
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर के भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग द्वारा शुक्रवार को ‘भारतीय ज्ञान परंपरा का स्वरूप एवं विस्तार’ विषय पर विशेष अतिथि व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के प्रख्यात विद्वान प्रो. बलराम शुक्ल रहे।
अपने व्याख्यान में प्रो. शुक्ल ने भारतीय ज्ञान परंपरा के ऐतिहासिक, दार्शनिक एवं सांस्कृतिक आयामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसकी वास्तविक शक्ति प्राचीनता, निरंतरता, बहुवैकल्पिकता और सहजीविता में निहित है। भारतीय ज्ञान परंपरा केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि निरंतर विकसित होने वाली जीवंत बौद्धिक धरोहर है। उन्होंने स्वउपनिवेशन (Self-Colonization) और प्राच्यवाद (Orientalism) जैसी अवधारणाओं की चर्चा करते हुए भारतीय ज्ञान परंपराओं को अपनी मौलिक दृष्टि से समझने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि परंपरा और आधुनिकता परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे की पूरक हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा की विशेषता उसकी विविधता, संवादशीलता और नवीन विचारों को आत्मसात करने की क्षमता है।
उल्लेखनीय है कि विश्वविद्यालय में वर्ष 2025 में स्थापित भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप भारतीय ज्ञान-विज्ञान, दर्शन, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को आधुनिक तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने की दिशा में कार्यरत है। विभाग के संस्थापक विभागाध्यक्ष डॉ. मिलिन्द राज आनन्द, सहायक आचार्य (अंग्रेजी) के नेतृत्व में विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत से परिचित कराने के लिए विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों एवं पाठ्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। विभाग का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आलोचनात्मक चिंतन, सांस्कृतिक चेतना और नवाचार की भावना विकसित करते हुए परंपरागत ज्ञान एवं आधुनिक प्रौद्योगिकी के बीच सार्थक समन्वय स्थापित करना है।
कार्यक्रम के अंत में मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एन. सिंह ने प्रो. बलराम शुक्ल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके व्याख्यान को ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी बौद्धिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ-साथ उनमें व्यापक और समन्वयात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यह आयोजन भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग द्वारा विद्यार्थियों को भारत की ज्ञान-संपदा एवं उसकी समकालीन प्रासंगिकता से परिचित कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।