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Sultanpur

समाजसेवी पप्पू रिजवान को मिला कोरोना योद्धा का खिताब

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शहीद वीर अब्दुल हमीद फाउंडेशन ने सादगी पूर्ण माहौल में दिया, सम्मानपत्र,

सुलतानपुर(विनोद पाठक)।समाजसेवी पप्पू रिजवान के द्वारा किए गये कोरोना काल में जरूरतमंदो की मदद और सहयोग को देखते हुए शहीद वीर अब्दुल हमीद फाउंडेशन ने उन्हें कोरोना योद्धा के सम्मान से सम्मानित किया है। देश में कोरोना की दस्तक की शुरुआत से आजतक पप्पू रिजवान और उनका पूरा कुनबा गरीबों की मदद के लिए नित नए,नए तरीके ईजाद कर लोगों की चौखट तक मदद पहुंचाने का काम कर रहा है। समाजसेवी पप्पू रिजवान और उनकी पत्नी नरगिस नायाब पूर्व प्रमुख (दूबेपुर) अपने आवास से प्रतिदिन 10 जरूरतमंदो को राशन देने का काम करती है। इन्ही तमाम सामाजिक सेवाएं देखने के पश्चात शहीद वीर अब्दुल हमीद फाउंडेशन के अध्यक्ष मकबूल इदरीसी ने पप्पू रिजवान को कोरोना योद्धा चयनित कर सम्मानित किया है। फाउंडेशन के अध्यक्ष मकबूल इदरीसी ने कहा की संस्था के पदाधिकारी कोरोना काल के चलते देश में लगाए गए लांकडाउन के समय जनपद के समस्त क्षेत्रों में भ्रमणशील रहे और जानकारी एकत्र करते रहे कि वो कौन लोग रहे जिन्होंने मुश्किल दौर में गरीब,असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए आगे आकर उनकी मदद किया है।उन्होने बताया की समाजसेवी पप्पू रिजवान के द्वारा किए गये कोरोना काल में जरूरतमंदो की मदद बहुत सराहनीय रही। उनके द्वारा पूरे जनपद में जरूरतमंदो के लिए मदद पहुंचाने का काम किया गया है। श्री इदरीसी ने कहाकि समाजसेवी पप्पू रिजवान आज भी जरूरतमंदो की मदद अपने घर और स्वयं गरीबों असहायों के चौखट तक पहुंच कर यथासंभव मदद कर रहे हैं। जो अपने आप में मिसाल साबित हो रही हैं। इसलिए शहीद वीर अब्दुल हमीद फाउंडेशन ने समाजसेवी पप्पू रिजवान को कोरोना योद्धा के रूप में चयनित कर उनको सम्मानित कर रहा है। सम्मान से नवाजे गए समाजसेवी पप्पू रिजवान ने कहाकि जो कुछ मैने और मेरा परिवार जरूरतमंदो के लिए कर रहा है। वह सिर्फ मेरे रब की मर्जी है। बाकी मैं इस लायक नही हूँ। श्री रिजवान ने कहा कि आज शहीद वीर अब्दुल हमीद फाउंडेशन के अध्यक्ष मकबूल इदरीसी साहब ने मुझे जिस सम्मान से नवाजा है। उसके लिए मै उनका और शहीद वीर अब्दुल हमीद फाउंडेशन के सभी भाइयों का धन्यवाद अदा करता हूँ। और भविष्य में भी मेरा मिशन जारी रहेगा।

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Ambala

मेघनाथ पराक्रम, लक्ष्मण शक्ति एवं कुंभकरण वध का मंचन हुआ

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करनैलगंज गोण्डा(ब्यूरो)। नगर की प्रसिद्ध रामलीला मंचन में रविवार को मेघनाथ पराक्रम, लक्ष्मण शक्ति एवं कुंभकरण वध की लीला का सजीव मंचन किया गया। लगातार रामलीला का मंचन देखने के लिए भीड़ बढ़ रही है। रविवार की लीला में मेघनाथ मायावी रथ पर आरूढ़ होकर अपने दल बल के साथ रामादल पर आक्रमण कर देता है। हनुमान, सुग्रीव, जामवंत व श्रीराम से युद्ध के बाद लक्ष्मण व मेघनाथ में घनघोर युद्ध होने लगता है। लक्ष्मण के बाणों से तिलमिला उठता है। अंत में उसने ब्रह्मा द्वारा प्राप्त शक्ति बाण का संधान किया। जिसके प्रहार से लक्ष्मण जी मूर्छित हो जाते है। फिर उनके राक्षसी सेना लक्ष्मण जी के शरीर को उठाने का प्रयास करती है इतने में हनुमान जी पहुंच जाते है और सारे राक्षसों को मार के भगा देते है और लक्ष्मण को मूर्छित अवस्था में श्रीराम के पास ले आते है। श्रीराम विलाप करने लगते है तभी विभीषण के परामर्श से हनुमान लंका जाते है और सुषेन वैध को उठाकर ले आते है। वैध के बताए अनुसार हनुमान जी द्रोरदागिरी पर्वत को प्रस्थान करते है तथा संजीवनी बूटी न खोज पाने के कारण पूरे पर्वत को उठाकर आकाश मार्ग से चल देते है। अवध क्षेत्र से गुजरते हुए भरत जी देखते है और बाण चला देते है, जिसके कारण हनुमान जी पर्वत सहित भूमि पर आ जाते है। भरत जी और हनुमान जी में वार्ता होती है तथा यह बताते है की यदि रात बीत गई तो संजीवनी का प्रभाव नही रह जायेगा और लक्ष्मण जी के प्राण बचाना मुश्किल हो जायेगा। अविलंब भरत से विदा होने के बाद हनुमान जी रमाद्ल में आ जाते है सुषेण वैध संजीवनी बूटी द्वारा औषधि तैयार करके लक्ष्मण को पिलाते है औषधि के प्रभाव लक्ष्मण जी चैतन्य अवस्था में आ जाते है सारे रामादल में प्रसन्नता को लहर छा जाती है। उधर रावण यह समाचार पाकर कुंभकरण को जगाने जाता है काफी प्रयास के बाद उसके उठने पर उसे मांस मंदिरा का सेवन कराया जाता है। फिर रावण सारी बाते बताता है कुंभकरण रावण को समझता है कि सीता जगदम्बा है उनका हरण करके तुमने अच्छा नही किया मां सीता कालरात्रि स्वरूपा है। इसलिए बैर व संघर्ष न करो सीता को वापस कर दो, तब रावण कुंभकरण पर क्रोधित होता है। भाई को उलहाना देता है अंत में कुंभकरण युद्ध के लिए प्रस्थान करता है। श्री राम में घनघोर युद्ध होता है राम के बाणों से उसका मस्तक कट जाता है वह वीरगति को प्राप्त होता है लंका में शोक व्याप्त हो जाता है। जिसमें रावण का अभिनय अभिषेक जायसवाल, मेघनाथ का अभिनय अनुज जायसवाल, कुम्भकरण का अभिनय विकास जायसवाल ने किया। लीला के लेखक व निर्देशक श्री भगवान साह तथा संचालक पंडित राम चरित्र मिश्र महाराज ने किया। मैदान में कन्हैया लाल वर्मा, नीरज जायसवाल, विमलेंद्र जायसवाल, कमलेश सोनी , आजाद कसेरा, अंसु, अंकित जायसवाल, अनूप गोस्वामी रहे।

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Sultanpur

भाजपा नेता भोला सिंह के लिए किसी “शगुन” से कम नही सुलतानपुर

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अस्सी के दशक में ही सुलतानपुर को चुना कार्य और अपना कर्म क्षेत्र

 

जिले में कमाया नाम और “शोहरत”

राजनीति के “गलियारों” में चर्चित नाम

सुलतानपुर(विनोद पाठक)। जिले के चर्चित व्यक्तियों में शुमार सरल,मृदुल भाषी स्वभाव के धनी भोला सिंह को सुल्तानपुर ने सब कुछ दिया। जमीन से क्षितिज की ऊंचाइयों तक पहुंचाया तो कार्य और कर्म क्षेत्र दोनों को यही स्थान चुना। जिले में “शोहरत” कमाई, साधन संपन्न हुए तो राजनीति “गलियारों” में भी सुर्खियों में रहे। अभी हाल में राष्ट्रप्रेम और पीएम मोदी-योगी की नीतियों से प्रेरित होकर भाजपा में चले गए। केंद्रीय नेतृत्व के सामने भाजपा में आस्था जताई तो राष्ट्रीय महामंत्री ने विधिवत भाजपा की सदस्यता दिलाई। भाजपा में आने के बाद पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक, शुभचिंतक बधाई देने के लिए आवास पर पहुंच रहे हैं। बधाई का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
गौरतलब हो कि नागेंद्र प्रताप सिंह (भोला सिंह) मूलता रायबरेली के जायस रेलवे स्टेशन के निकट के मूल निवासी हैं, जो वर्तमान में अमेठी जिले के बहादुरपुर विकासखंड में स्थित है। भोला सिंह का ननिहाल और ससुराल जनपद सुलतानपुर में ही है। भोला सिंह का ननिहाल सरैया बनकेपुर तो ससुराल जिले की चर्चित ग्राम सभा उतरी में है। भोला सिंह की प्रारंभिक शिक्षा ननिहाल में हुई। उच्च शिक्षा भी जिले से ही ग्रहण की। 1984-85 में भोला सिंह ने अपना कार्य और कर्म क्षेत्र दोनों ही सुलतानपुर को ही चुना तो व्यवसाय में भी आसमान की ऊंचाइयों पर पहुंचे। व्यवसाई के रूप में जिले में खूब ख्याति अर्जित की। तो राजनीति के क्षेत्र में भी खूब नाम कमाए। नाम तो नागेंद्र प्रताप सिंह है लेकिन उपनाम (भोला सिंह) के नाम से सुल्तानपुर और अमेठी दोनों जिले में खूब चर्चित हुए। व्यवसाय के साथ-साथ 1991 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए। काफी अर्से तक कांग्रेस पार्टी की बहुत ही ईमानदारी और मजबूती के साथ राजनीति की। इसी दौरान जीवन में उतार-चढ़ाव को भी देखा है, लेकिन हिम्मत नहीं हारी, साहस को टूटने नहीं दिया। अपनी मेहनत और दिमाग का लोहा मनवाते हुए फिर से व्यवसाय में उसी मुकाम को हासिल किया,जिसके लिए चर्चित थे। जब कर्म क्षेत्र और कार्यक्षेत्र दोनों ने भोला सिंह का साथ दिया तो भोला सिंह यही के मतलब सुलतानपुर के होकर रह गए। अर्थात सुलतानपुर में ही अपना “बसेरा” बनाया। उतरी और नगर क्षेत्र के माल गोदाम रोड पर आवास बनवाया। अब यहीं से भोला सिंह नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की। भाजपा में अभी हाल ही में 12 अप्रैल को केंद्रीय नेतृत्व के सामने शामिल हुए। लेकिन इनका लगाव कई अरसे से भाजपा में ही चल रहा है। बात बात में भोला सिंह बयां करते हैं कि मोदी और योगी की नीतियों से प्रभावित होकर भाजपा में आस्था जताई है। भाजपा का राष्ट्रप्रेम जग जाहिर है। भाजपा ही देश को एक अच्छे मुकाम पर ले जाने के लिए प्रयासरत है। हर क्षेत्र में देश मजबूत हुआ है। इन्हीं सब की वजह से भाजपा के प्रति लगाव बढ़ा तो भाजपा के हो गए। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद जब भोला सिंह अपने कर्म और कार्य क्षेत्र के जनपद सुलतानपुर पहुंचे हैं तब से बधाई देने वालों का सिलसिला बा दस्तूर जारी है।

 

जिले के चर्चित व्यसायी नागेंद्र प्रताप सिंह (भोला) भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के लिए जिला और प्रदेश को नही चुना। सीधे नेतृत्व के करीब रहने वाले भोला सिंह 12 अप्रैल को नई दिल्ली पहुंचे। पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री बाबूभाई जेबलिया तथा मनोज कुमार यादव के समक्ष पार्टी की विधिवत सदस्यता ग्रहण की। राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने भाजपा का गमक्षा पहनाकर पार्टी में आने का स्वागत किया।

 

सुलतानपुर ने भाजपा नेता भोला सिंह को सब कुछ दिया, ननिहाल दिया, ससुराल दी, साथ ही सुलतानपुर ने प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक दी। कर्म और कार्यक्षेत्र भी दिया। नाम दिया और शोहरत भी दी। लेकिन अपना “मृदुल” स्वभाव कभी नहीं छोड़ा और न ही “नेचर” में कोई बदलाव आया। अक्सर देखने को मिलता है कि जब किसी व्यक्ति का समय बदलता है तो “नेचर” भी बदल जाता है, लेकिन जैसे पहले थे, वैसे आज भी मिलनसार हैं और जनता के बीच में पकड़ भी है। किसी शायर ने कहा है कि बरसात में तालाब भी हो जाते हैं कमज़र्फ, लेकिन समुद्र को कभी बहकना नहीं आता। कहने का मतलब की साधन संपन्न होते हुए कोई अहंकार और घमंड भोला सिंह के अंदर नहीं है। इसीलिए जिले में जनता के बीच चर्चा में रहते हैं।

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Sultanpur

..जब हाथ में मुंगरी लेकर सरपत पीटने लगीं सांसद मेनका गांधी

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अपनत्व और ममत्व का अद्भुद दृश्य की दिखी झलक

सांसद जी का दिखा देहाती महिला का रूप

सुल्तानपुर(विनोद पाठक)। सांसद हो तो ऐसा ही। अपनत्व और ममत्व का अद्भुद दृश्य की झलक। साथ मे उत्साह वर्धन भी।वह भी खड़ी दोपहरिया में। जब सब पसीना पसीना थे। हुआ यूं कि सांसद जी का काफिला गुजर रहा था। सांसद मेनका गांधी की नजर सरपत पीट रही महिला पर पड़ी। काफिला रुका सांसद जी का। फिर क्या देहाती महिला का रूप भी सांसद जी का दिखा। सब के सब दंग रह गए। मेनका गांधी महिला के सामने उसी स्टाइल में बैठ गई,पलथी मारके। हाथ मे मुंगरी उठाई। सामने बैठी महिला मान मनौव्वल करने लगी। अरे रहय दिए, चोट लग जाई माता जी। पर, माता सांसद जी नही मानी। हाथ मे मुंगरी उठाई और सरपत को पीटने लगी। यह दृश्य देख तालियों की गड़गड़ाहट से सांसद जी का स्वागत किया गया।
दौरे के दूसरे दिन बहाउद्दीनपुर गांव में जनसभा करके लौट रहीं सांसद मेनका गांधी का काफिला रुक गया।श्रीमती गांधी पेड़ की छाव में गीता देवी निषाद को मूंज तैयार करते देखा तो वह उनके करीब पहुँची और मुंगरी लेकर सरपत को लगीं पीटने।सांसद मेनका गांधी ने कहा कि यह सरपत ढंग से न पकड़े तो हाथों से खून निकाल देता है, लेकिन एक माँ अपने हाथ से उसे मुलायम बना कर दो पैसे की आमदनी कर घर का खर्चा चलती है।उन्होंने कहा कि आने वाले समय मे वह इस व्यसाय को सही प्लेटफार्म तक पहुचाएंगी। एक देहाती मुहाबरा है कि “जाके पैर न फाट बेवाई,वह का जानै पीर पराई”, के जुमले को भी नकार दिया। सांसद जी ने। सांसद जी ने यह साबित किया कि वह सब परिस्थितियों से गुजरी है, उन्हें हर बारीकियों का पता भी है। यही वजह है कि लंबे समय से राजनीति में शिखर पर हैं । विकास के प्रति सजग सेवा समर्पण भाव कूट-कूट के सांसद जी के अंदर भरा है और सुलतानपुर की जनता सांसद की इसी कार्यशैली की कायल हो गई है।

राम नवमी पर राम राज्य का दिया सन्देश

सांसद मेनका गांधी ने कहा कि राम राज्य में सभी का ख्याल रखा जाता था । इसी मंशा से जनपद में चार फायर ब्रिगेड, विरसिंगपुर में इसी माह एक अस्पताल, नवोदय स्कूल,मेडिकल कालेज, पालीटेक्निक, रजिस्ट्री ऑफिस जयसिंहपुर में,लंभुआ में अस्पताल आदि जैसी सुविधाएं और सौगात सुल्तानपुर वासियो को मिलने जा रही है।

सुल्तानपुर से लखनऊ ट्रेन की सुविधा

सांसद मेनका गांधी ने महिलाओं का उत्साह वर्धन करते हुए कहा कि आप पर दो जिम्मेवारी होती है ।एक तो घर बनाने की दूसरी घर के सदस्यों का ख्याल रखने का।ऐसे ही मुझे एक माँ की तरह आपके बीच आकर कर रहीं हूँ।आपकी सुविधा को ध्यान में रखते हुए सुल्तानपुर से लखनऊ आदि महानगरों के लिए ट्रेनों की सुविधा दी गयी, आगे और भी योजनाएं शुरू की जाएंगी।

दबंग जोत रहे हमारी जमीन:पीड़िता

ग्रामीणों के बीच पहुंची सांसद मेनका गांधी को एक महिला ने बताया कि उसकी जमीन दबंगों द्वारा जोती बोई जा रही है।जिस पर नाराज सांसद मेनका गांधी ने उक्त दरखास्त को वहां खड़े गोसाईगंज एसओ संदीप राय को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए ।कहा कि जनपद में दबंगई करने वालों को सख्त से सख्त सजा दी जाए ।

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