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Sultanpur

डीएम की अध्यक्षता में शासन के सर्वोंच्च प्राथमिकता कार्यक्रम के विकास कार्यों की हुई बैठक हुई

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सुलतानपुर(विनोद पाठक)। जिलाधिकारी रवीश गुप्ता की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में शासन के सर्वोच्च प्राथमिकता कार्यक्रम के नवीन 37 प्रारूप पर विकास कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। डीएम ने विभागवार समीक्षा कर उपस्थित अधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने विभाग की योजनाओं में प्रगति लाये तथा जन कल्याणकारी कार्यक्रमों का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचायें।
जिलाधिकारी ने समीक्षा बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों से प्रारूप वार प्रगति की जानकारी प्राप्त कर आवश्यक दिशा निर्देश दिये। उन्होंने समस्त कार्यदायी संस्थाओं को निर्देशित किया कि सभी निर्माणाधीन परियोजनाओं को शीघ्र पूर्ण करायें।
उन्होंने प्रारूपों पर पुनर समीक्षा कर संबंधित अधिकारियों को प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने इसी प्रकार उपस्थित सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी अधिकारी अपने अपने कार्यों की जानकारी के साथ बैठक में प्रतिभाग करें।
जिलाधिकारी ने बैठक में कुछ अधिकारियों को समय से न आने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए निर्देश दिया कि भविष्य में होने वाली बैठकों में समय से उपस्थित होना सुनिश्चित करेंगे।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अतुल वत्स, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 सीबीएन त्रिपाठी, जिला विकास अधिकारी डॉ0 डी0आर0 विश्वकर्मा, डीएफओ आनंदेश्वर प्रसाद, उप निदेशक कृषि शैलेंद्र कुमार शाही, वरिष्ठ कोषाधिकारी वरूण खरे, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी पन्ना लाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी दिनेश सिंह, समाज कल्याण अधिकारी आर0बी0 सिंह, जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी चन्द्रेश त्रिपाठी सहित निर्माणाधीन कार्यदायी संस्थाओं के अधिशाषी अभियन्ता व संबंधित विभागों के अधिकारीगण आदि उपस्थित रहे।

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Sultanpur

प्रोफ़ेसर की मांग पर इसौली में विधायक बनवाएंगे अंत्येष्टि स्थल!

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चमकेगी गांव के गलियों की सड़कें

विधायक मोहम्मद ताहिर खान ने ने किया बड़ा ऐलान

बल्दीराय,सुलतानपुर(शिवम श्रीवास्तव)। प्रोफ़ेसर की मांग पर इस इसरौली ग्राम पंचायत में इसी सत्र में ही अंत्येष्टि स्थल बनेगा। इस पर अमलीजामा क्षेत्रीय विधायक मोहम्मद ताहिर खान पहनाएंगे। इसके लिए वकायदे विधायक ने ऐलान कर दिया है। प्रोफ़ेसर समेत ग्रामीणों की मांग पर इसौली ग्राम पंचायत के गोमती नदी घाट पर अंत्येष्टि स्थल बनाएंगे। साथ ही गांव की जर्जर सड़कों को भी चमकाने का काम विधायक करेंगे।
गौरतलब हो कि इसौली ग्राम पंचायत के नाम पर इसौली विधानसभा का गठन हुआ है। लेकिन इसौली ग्राम पंचायत में बुनियादी सुविधाएं नदारद है। गांव की गलियां की हालत इतनी खराब है कि उधर से गुजरना “हाथी मारकर दांत” उखाड़ने के समान है। प्रदेश में इसौली विधानसभा का अपना अलग महत्व है। यह ऐसी विधानसभा है कि यहां के चुने विधायक मुख्यमंत्री बने, मंत्री बने। लेकिन गांव का विकास जैसे आजादी के पहले था, वैसे आज भी। गांव की पहचान अत पिछड़े में शुमार है। गांव का कायाकल्प करने के लिए प्रोफेसर विनोद श्रीवास्तव जो राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय अयोध्या में कार्यरत हैं और अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष है। उनकी और ग्रामीणों की मांग पर गांव का सुंदरीकरण करने के लिए विधायक मोहम्मद ताहिर खान ने बीड़ा उठाया है। विधायक ने कहा है कि प्रोफ़ेसर समेत ग्रामीणों की मांग पर सत्र 2023 में इसौली ग्राम पंचायत में अंत्येष्टि स्थल तो बनेगा ही, साथ ही गांव की गलियां भी चमकेगी। गांव के गलियों के अंदर बेहतरीन आरसीसी, इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण भी कराने की घोषणा विधायक मोहम्मद ताहिर खान ने की है। मोहम्मद ताहिर खान के इस ऐलान से गांव वासियों ने खुशी का इजहार किया है। कहा है कि विधायक मोहम्मद ताहिर खान इसकी शुरुआत कर दी है। गांव के ऐतिहासिक मंदिर के पास हाई मास्ट लाइट लगाकर बहुत ही पुनीत कार्य किया है। विधायक की घोषणा पर गांववासी बड़े बेबाकी से कहते हैं कि क्षेत्रीय जनता की उम्मीदों पर विधायक खरे उतर रहे हैं। विधायक के स्तर से कराए जा रहे विकास कार्य में सामाजिक समरसता की झलक दिखती है। विधायक मोहम्मद ताहिर खान ने कहा कि अब इसौली ग्राम पंचायत की पहचान उसके “विकास” के नाम से होगी।

 

मेरे नैना सावन भादो, फिर भी मेरा मन प्यासा

सुलतानपुर। 1976 में बनी फिल्म महबूबा के गीत “मेरे नैना सावन भादो, फिर भी मेरा मन प्यासा”। यह फिल्मी गाना एकदम इसौली ग्राम पंचायत पर सटीक बैठता है। ऐसा इसलिए की जिस ग्राम पंचायत इसौली के नाम पर इसौली विधानसभा का गठन हुआ। चाही पुरानी इसौली रही हो या फिर नए परिसीमन में नई इसरौली। दोनों ही स्थिति में इसौली ही विधानसभा का नाम पड़ा। इसौली विधानसभा से नामी-गिरामी हस्तियां चुनाव जीती। यहां तक की इसौली विधानसभा ने मुख्यमंत्री भी दिया और मंत्री भी। लेकिन इसौली ग्राम पंचायत की स्थिति जस की तस। आजादी के पहले भी और आजादी के बाद भी, हालात वैसे ही। ग्राम पंचायत में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव। जबकि इसौली ग्राम पंचायत अपने आप में इतिहास संजोए हुए है। बताया तो यहां तक जाता है कि कभी इसौली “राजभरों” की राजधानी हुआ करती थी, लेकिन चुने गए अधिकांश जनप्रतिनिधि विकास कार्य तो क्षेत्र का कराए,लेकिन इसौली ग्राम पंचायत के विकास के लिए तनिक भी नहीं सोचा। अब इसौली के लोग विधायक मोहम्मद ताहिर खान से आस लगाए बैठे हैं कि क्षेत्रीय विधायक निश्चित तौर पर गांव में विकास की गंगा बहाने का काम करेंगे।

 

 

हाई मास्क एक, फायदे अनेक

सुलतानपुर। इसौली विधायक मोहम्मद ताहिर खान ने क्षेत्र के विकास का जो खाका खींचा है, उसमें सामाजिक समरसता की झलक दिखती है। विकास कार्य में समाजवाद की छाप भी है। क्षेत्र के चौराहों और धार्मिक स्थलों पर हाई मार्क्स लाइट लगाने का कार्य विधायक निधि से चल रहा है। कई दर्जन स्थान ऐसे चुने गए हैं, जिससे समाज के हर वर्ग को फायदा मिले। कहने को तो चौराहों पर एक हाई मास्क लाइट लग रही है, लेकिन उसके फायदे अनेक हैं। चौराहे पर प्रकाश तो हो ही रहा है, प्रकाशमान चौराहा होने पर अराजक तत्व पर भी पहरा लग गया है। अंधेरे के आड़ में अराजक तत्व जो गलत कार्य करते थे, अब उस पर भी काफी हद तक अंकुश लग गया है। चौराहे से गुजरने वाले महिला, पुरुष भी सुरक्षित हैं तो चौराहों पर लगने वाली बाजार,लगने वाले ठेला,घुमटी, दुकानदार की आमदनी भी बढ़ गई है। पहले अंधेरा होने पर छोटा-मोटा व्यवसाय करने वाले व्यवसाई जल्द अपना बोरिया, बिस्तर समेट कर घर चले जाते थे,लेकिन अब जब से चौराहों पर हाई मास्क लाइट लग गई है, तब से उनके व्यवसाय में भी “चार चांद” लग गया है। व्यवसाय का टाइम कम से कम 2 घंटा बढ़ गया है। विधायक के स्तर से चौराहों पर लगाई गई हाईमार्क लाइट को लेकर बाजार वासियों ने क्षेत्रीय विधायक को बधाई और शुभकामना दी है कि विधायक के द्वारा कराए जा रहे विकास कार्य में सामाजिक समरसता की झलक है। विकास की किरण अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्त तक पहुंच रही है। इसकी जितनी सराहना की जाए कम है।

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Ambala

मेघनाथ पराक्रम, लक्ष्मण शक्ति एवं कुंभकरण वध का मंचन हुआ

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करनैलगंज गोण्डा(ब्यूरो)। नगर की प्रसिद्ध रामलीला मंचन में रविवार को मेघनाथ पराक्रम, लक्ष्मण शक्ति एवं कुंभकरण वध की लीला का सजीव मंचन किया गया। लगातार रामलीला का मंचन देखने के लिए भीड़ बढ़ रही है। रविवार की लीला में मेघनाथ मायावी रथ पर आरूढ़ होकर अपने दल बल के साथ रामादल पर आक्रमण कर देता है। हनुमान, सुग्रीव, जामवंत व श्रीराम से युद्ध के बाद लक्ष्मण व मेघनाथ में घनघोर युद्ध होने लगता है। लक्ष्मण के बाणों से तिलमिला उठता है। अंत में उसने ब्रह्मा द्वारा प्राप्त शक्ति बाण का संधान किया। जिसके प्रहार से लक्ष्मण जी मूर्छित हो जाते है। फिर उनके राक्षसी सेना लक्ष्मण जी के शरीर को उठाने का प्रयास करती है इतने में हनुमान जी पहुंच जाते है और सारे राक्षसों को मार के भगा देते है और लक्ष्मण को मूर्छित अवस्था में श्रीराम के पास ले आते है। श्रीराम विलाप करने लगते है तभी विभीषण के परामर्श से हनुमान लंका जाते है और सुषेन वैध को उठाकर ले आते है। वैध के बताए अनुसार हनुमान जी द्रोरदागिरी पर्वत को प्रस्थान करते है तथा संजीवनी बूटी न खोज पाने के कारण पूरे पर्वत को उठाकर आकाश मार्ग से चल देते है। अवध क्षेत्र से गुजरते हुए भरत जी देखते है और बाण चला देते है, जिसके कारण हनुमान जी पर्वत सहित भूमि पर आ जाते है। भरत जी और हनुमान जी में वार्ता होती है तथा यह बताते है की यदि रात बीत गई तो संजीवनी का प्रभाव नही रह जायेगा और लक्ष्मण जी के प्राण बचाना मुश्किल हो जायेगा। अविलंब भरत से विदा होने के बाद हनुमान जी रमाद्ल में आ जाते है सुषेण वैध संजीवनी बूटी द्वारा औषधि तैयार करके लक्ष्मण को पिलाते है औषधि के प्रभाव लक्ष्मण जी चैतन्य अवस्था में आ जाते है सारे रामादल में प्रसन्नता को लहर छा जाती है। उधर रावण यह समाचार पाकर कुंभकरण को जगाने जाता है काफी प्रयास के बाद उसके उठने पर उसे मांस मंदिरा का सेवन कराया जाता है। फिर रावण सारी बाते बताता है कुंभकरण रावण को समझता है कि सीता जगदम्बा है उनका हरण करके तुमने अच्छा नही किया मां सीता कालरात्रि स्वरूपा है। इसलिए बैर व संघर्ष न करो सीता को वापस कर दो, तब रावण कुंभकरण पर क्रोधित होता है। भाई को उलहाना देता है अंत में कुंभकरण युद्ध के लिए प्रस्थान करता है। श्री राम में घनघोर युद्ध होता है राम के बाणों से उसका मस्तक कट जाता है वह वीरगति को प्राप्त होता है लंका में शोक व्याप्त हो जाता है। जिसमें रावण का अभिनय अभिषेक जायसवाल, मेघनाथ का अभिनय अनुज जायसवाल, कुम्भकरण का अभिनय विकास जायसवाल ने किया। लीला के लेखक व निर्देशक श्री भगवान साह तथा संचालक पंडित राम चरित्र मिश्र महाराज ने किया। मैदान में कन्हैया लाल वर्मा, नीरज जायसवाल, विमलेंद्र जायसवाल, कमलेश सोनी , आजाद कसेरा, अंसु, अंकित जायसवाल, अनूप गोस्वामी रहे।

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Sultanpur

भाजपा नेता भोला सिंह के लिए किसी “शगुन” से कम नही सुलतानपुर

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अस्सी के दशक में ही सुलतानपुर को चुना कार्य और अपना कर्म क्षेत्र

 

जिले में कमाया नाम और “शोहरत”

राजनीति के “गलियारों” में चर्चित नाम

सुलतानपुर(विनोद पाठक)। जिले के चर्चित व्यक्तियों में शुमार सरल,मृदुल भाषी स्वभाव के धनी भोला सिंह को सुल्तानपुर ने सब कुछ दिया। जमीन से क्षितिज की ऊंचाइयों तक पहुंचाया तो कार्य और कर्म क्षेत्र दोनों को यही स्थान चुना। जिले में “शोहरत” कमाई, साधन संपन्न हुए तो राजनीति “गलियारों” में भी सुर्खियों में रहे। अभी हाल में राष्ट्रप्रेम और पीएम मोदी-योगी की नीतियों से प्रेरित होकर भाजपा में चले गए। केंद्रीय नेतृत्व के सामने भाजपा में आस्था जताई तो राष्ट्रीय महामंत्री ने विधिवत भाजपा की सदस्यता दिलाई। भाजपा में आने के बाद पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक, शुभचिंतक बधाई देने के लिए आवास पर पहुंच रहे हैं। बधाई का सिलसिला बदस्तूर जारी है।
गौरतलब हो कि नागेंद्र प्रताप सिंह (भोला सिंह) मूलता रायबरेली के जायस रेलवे स्टेशन के निकट के मूल निवासी हैं, जो वर्तमान में अमेठी जिले के बहादुरपुर विकासखंड में स्थित है। भोला सिंह का ननिहाल और ससुराल जनपद सुलतानपुर में ही है। भोला सिंह का ननिहाल सरैया बनकेपुर तो ससुराल जिले की चर्चित ग्राम सभा उतरी में है। भोला सिंह की प्रारंभिक शिक्षा ननिहाल में हुई। उच्च शिक्षा भी जिले से ही ग्रहण की। 1984-85 में भोला सिंह ने अपना कार्य और कर्म क्षेत्र दोनों ही सुलतानपुर को ही चुना तो व्यवसाय में भी आसमान की ऊंचाइयों पर पहुंचे। व्यवसाई के रूप में जिले में खूब ख्याति अर्जित की। तो राजनीति के क्षेत्र में भी खूब नाम कमाए। नाम तो नागेंद्र प्रताप सिंह है लेकिन उपनाम (भोला सिंह) के नाम से सुल्तानपुर और अमेठी दोनों जिले में खूब चर्चित हुए। व्यवसाय के साथ-साथ 1991 में कांग्रेस पार्टी में शामिल हुए। काफी अर्से तक कांग्रेस पार्टी की बहुत ही ईमानदारी और मजबूती के साथ राजनीति की। इसी दौरान जीवन में उतार-चढ़ाव को भी देखा है, लेकिन हिम्मत नहीं हारी, साहस को टूटने नहीं दिया। अपनी मेहनत और दिमाग का लोहा मनवाते हुए फिर से व्यवसाय में उसी मुकाम को हासिल किया,जिसके लिए चर्चित थे। जब कर्म क्षेत्र और कार्यक्षेत्र दोनों ने भोला सिंह का साथ दिया तो भोला सिंह यही के मतलब सुलतानपुर के होकर रह गए। अर्थात सुलतानपुर में ही अपना “बसेरा” बनाया। उतरी और नगर क्षेत्र के माल गोदाम रोड पर आवास बनवाया। अब यहीं से भोला सिंह नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की। भाजपा में अभी हाल ही में 12 अप्रैल को केंद्रीय नेतृत्व के सामने शामिल हुए। लेकिन इनका लगाव कई अरसे से भाजपा में ही चल रहा है। बात बात में भोला सिंह बयां करते हैं कि मोदी और योगी की नीतियों से प्रभावित होकर भाजपा में आस्था जताई है। भाजपा का राष्ट्रप्रेम जग जाहिर है। भाजपा ही देश को एक अच्छे मुकाम पर ले जाने के लिए प्रयासरत है। हर क्षेत्र में देश मजबूत हुआ है। इन्हीं सब की वजह से भाजपा के प्रति लगाव बढ़ा तो भाजपा के हो गए। भाजपा की सदस्यता लेने के बाद जब भोला सिंह अपने कर्म और कार्य क्षेत्र के जनपद सुलतानपुर पहुंचे हैं तब से बधाई देने वालों का सिलसिला बा दस्तूर जारी है।

 

जिले के चर्चित व्यसायी नागेंद्र प्रताप सिंह (भोला) भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के लिए जिला और प्रदेश को नही चुना। सीधे नेतृत्व के करीब रहने वाले भोला सिंह 12 अप्रैल को नई दिल्ली पहुंचे। पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री बाबूभाई जेबलिया तथा मनोज कुमार यादव के समक्ष पार्टी की विधिवत सदस्यता ग्रहण की। राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने भाजपा का गमक्षा पहनाकर पार्टी में आने का स्वागत किया।

 

सुलतानपुर ने भाजपा नेता भोला सिंह को सब कुछ दिया, ननिहाल दिया, ससुराल दी, साथ ही सुलतानपुर ने प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक दी। कर्म और कार्यक्षेत्र भी दिया। नाम दिया और शोहरत भी दी। लेकिन अपना “मृदुल” स्वभाव कभी नहीं छोड़ा और न ही “नेचर” में कोई बदलाव आया। अक्सर देखने को मिलता है कि जब किसी व्यक्ति का समय बदलता है तो “नेचर” भी बदल जाता है, लेकिन जैसे पहले थे, वैसे आज भी मिलनसार हैं और जनता के बीच में पकड़ भी है। किसी शायर ने कहा है कि बरसात में तालाब भी हो जाते हैं कमज़र्फ, लेकिन समुद्र को कभी बहकना नहीं आता। कहने का मतलब की साधन संपन्न होते हुए कोई अहंकार और घमंड भोला सिंह के अंदर नहीं है। इसीलिए जिले में जनता के बीच चर्चा में रहते हैं।

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