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Mthura

एटीएम कार्ड का क्लोन बना खाते से उड़ाए 76 हजार

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मथुरा (श्याम सिंह) सुरीर एटीएम कार्ड का क्लोन बनाकर बैंक खाते से रुपए निकालने वाला गिरोह क्षेत्र में भी सक्रिय है। सीआइएसएफ जवान के एटीएम कार्ड का क्लोन बनाकर साइबर ठगों ने उनके बैंक खाते से साढ़े छिहत्तर हजार रुपये निकाल लिए। पीड़ित जवान ने मामले की रिपोर्ट को आनलाइन शिकायत की है। कस्बा सुरीर निवासी जगदीश प्रसाद सीआइएसएफ में नौकरी करते हैं। हाल ही में उनका जम्मू कश्मीर से रिफाइनरी मथुरा के लिए स्थानांतरण हुआ है। स्थानांतरण होने पर वह पंद्रह दिन की छुट्टी पर घर आए हैं। उनका बैंक खाता इंद्रापुरम गाजियाबाद स्थित स्टेट बैंक शाखा में हैं। जिसका एटीएम कार्ड उनके पास रहता है। पिछले माह उन्होंने पैसे निकालने के लिए बेटे सोनू को एटीएम कार्ड लेकर भेजा था। सुरीर में एटीएम मशीन खराब होने पर सोनू पैसे निकालने के लिए एटीएम कार्ड लेकर मांट गया था। इसके बाद उनके खाते से 76500 रुपये पलवल, बल्लभगढ़ और भिवाड़ी में एटीएम कार्ड के जरिए तीन बार में निकाले गए हैं। जबकि असली एटीएम कार्ड जवान के पास मौजूद है। जब खाते से पैसे निकलने की जानकारी हुई तो उन्होंने संबंधित बैंक शाखा के अलावा स्थानीय थाने में पुलिस से शिकायत की है, लेकिन पुलिस की ओर से हीलाहवाली देख उन्होंने अब अपने साथ हुई इस धोखाधड़ी की आनलाइन शिकायत की है।

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Ambala

मेघनाथ पराक्रम, लक्ष्मण शक्ति एवं कुंभकरण वध का मंचन हुआ

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करनैलगंज गोण्डा(ब्यूरो)। नगर की प्रसिद्ध रामलीला मंचन में रविवार को मेघनाथ पराक्रम, लक्ष्मण शक्ति एवं कुंभकरण वध की लीला का सजीव मंचन किया गया। लगातार रामलीला का मंचन देखने के लिए भीड़ बढ़ रही है। रविवार की लीला में मेघनाथ मायावी रथ पर आरूढ़ होकर अपने दल बल के साथ रामादल पर आक्रमण कर देता है। हनुमान, सुग्रीव, जामवंत व श्रीराम से युद्ध के बाद लक्ष्मण व मेघनाथ में घनघोर युद्ध होने लगता है। लक्ष्मण के बाणों से तिलमिला उठता है। अंत में उसने ब्रह्मा द्वारा प्राप्त शक्ति बाण का संधान किया। जिसके प्रहार से लक्ष्मण जी मूर्छित हो जाते है। फिर उनके राक्षसी सेना लक्ष्मण जी के शरीर को उठाने का प्रयास करती है इतने में हनुमान जी पहुंच जाते है और सारे राक्षसों को मार के भगा देते है और लक्ष्मण को मूर्छित अवस्था में श्रीराम के पास ले आते है। श्रीराम विलाप करने लगते है तभी विभीषण के परामर्श से हनुमान लंका जाते है और सुषेन वैध को उठाकर ले आते है। वैध के बताए अनुसार हनुमान जी द्रोरदागिरी पर्वत को प्रस्थान करते है तथा संजीवनी बूटी न खोज पाने के कारण पूरे पर्वत को उठाकर आकाश मार्ग से चल देते है। अवध क्षेत्र से गुजरते हुए भरत जी देखते है और बाण चला देते है, जिसके कारण हनुमान जी पर्वत सहित भूमि पर आ जाते है। भरत जी और हनुमान जी में वार्ता होती है तथा यह बताते है की यदि रात बीत गई तो संजीवनी का प्रभाव नही रह जायेगा और लक्ष्मण जी के प्राण बचाना मुश्किल हो जायेगा। अविलंब भरत से विदा होने के बाद हनुमान जी रमाद्ल में आ जाते है सुषेण वैध संजीवनी बूटी द्वारा औषधि तैयार करके लक्ष्मण को पिलाते है औषधि के प्रभाव लक्ष्मण जी चैतन्य अवस्था में आ जाते है सारे रामादल में प्रसन्नता को लहर छा जाती है। उधर रावण यह समाचार पाकर कुंभकरण को जगाने जाता है काफी प्रयास के बाद उसके उठने पर उसे मांस मंदिरा का सेवन कराया जाता है। फिर रावण सारी बाते बताता है कुंभकरण रावण को समझता है कि सीता जगदम्बा है उनका हरण करके तुमने अच्छा नही किया मां सीता कालरात्रि स्वरूपा है। इसलिए बैर व संघर्ष न करो सीता को वापस कर दो, तब रावण कुंभकरण पर क्रोधित होता है। भाई को उलहाना देता है अंत में कुंभकरण युद्ध के लिए प्रस्थान करता है। श्री राम में घनघोर युद्ध होता है राम के बाणों से उसका मस्तक कट जाता है वह वीरगति को प्राप्त होता है लंका में शोक व्याप्त हो जाता है। जिसमें रावण का अभिनय अभिषेक जायसवाल, मेघनाथ का अभिनय अनुज जायसवाल, कुम्भकरण का अभिनय विकास जायसवाल ने किया। लीला के लेखक व निर्देशक श्री भगवान साह तथा संचालक पंडित राम चरित्र मिश्र महाराज ने किया। मैदान में कन्हैया लाल वर्मा, नीरज जायसवाल, विमलेंद्र जायसवाल, कमलेश सोनी , आजाद कसेरा, अंसु, अंकित जायसवाल, अनूप गोस्वामी रहे।

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बलिदान दिवस:महाराजा सूरजमल के बलिदान को किया याद, वक्ताओं ने कहा-वे कुशल शासक व वीर योद्धा थे

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हवन,सम्मान समारोह के साथ याद किये महाराजा सूरजमल

बलिदान दिवस पर लिया महाराजा के आदर्शों पर चलने का संकल्प

मथुरा(कालीचरन बिन्दल)महाराजा सूरजमल स्मृति न्यास द्वारा सिविल लाइन स्थित गार्डन में महाराजा सूरजमल का 257वां बलिदान दिवस मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक यज्ञ के साथ की गई जिसमें वेद की ऋचाओं के साथ प्रधान सत्य प्रिय आर्य द्वारा आहुतियां प्रदान करवाई गई। हवन के पश्चात वक्ताओं ने महाराजा सूरजमल के जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला। वक्ताओं में पूर्व मंत्री चौधरी सरदार सिंह, किसान नेता बुद्धा सिंह प्रधान, पार्षद राकेश ठेनुआ, पार्षद तिलकवीर सिंह, पार्षद सूरज तोमर, मनोज चौधरी, आरबी चौधरी, लाल सिंह आर्य, हरपाल सिंह, सुरेंद्र सिंह आदि प्रमुख रहे। इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में न्यायिक सेवा मैं न्यायाधिकारी बनी स्वाति सिंह को जाट गरिमा तथा हरेंद्र सिंह एवं सुमित कुमार को जाट रत्न सम्मान तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। वही सैन्य सेवाओं में कमीशन प्राप्त करने वाले युवाओं में कैप्टन सुदीप कुमार, लेफ्टिनेंट प्रशांत कुमार, नवीन चौधरी, यूपीपीसीएस पास कर डिप्टी कलेक्टर बने दिग्विजय सिंह, रविंद्र सिंह तथा पीपीएस अधिकारी चयनित हुए गौरव सिंह चिकित्सा के क्षेत्र में डिप्टी सीएमओ मथुरा डॉ मुनेंद्र सिंह तथा अपर जिला शासकीय अधिवक्ता नियुक्त हुए एड विजयेंद्र वैदिक, राजू सिंह एवं भीष्म दत्त सिंह तोमर को जाट रत्न सम्मान तथा प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन प्रतिमा सिंह एवं धन्यवाद न्यास के संस्थापक ट्रस्टी चौधरी विजय आर्य ने किया। इस अवसर पर चौधरी भंवर सिंह, एड. उमाशंकर सिंह, डॉ जय कुमार सिंह, दलबीर विद्रोही, विवेक प्रिय आर्य, नवीन चौधरी वृंदावन, पुष्पेंद्र चौधरी भरउ, कैप्टन उधम सिंह, जगवीर चौधरी, नरेंद्र चौधरी, रवि नौहवार, रघुनाथ सिंह, विनीता वर्मा, मीना चौधरी, मोनू चौधरी, भानू प्रताप सिंह, दुष्यन्त रोलयाना, पवन चौधरी, सीपी सिंह चाहर आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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धूमधाम से मनाया गया वृन्दावन धाम का प्राकट्य महोत्सव

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राधावल्लभ मंदिर मे तीन दिवसीय श्रीहित वृन्दावन महोत्सव हुआ संपन्न

वृन्दावन(कालीचरन बिंदल) कान्हा की नगरी वृन्दावन धाम में तीन दिवसीय श्रीहित वृन्दावन महोत्सव बड़े ही धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। राधावल्लभ मंदिर में वृन्दावन महोत्सव की शुरूआत प्रातःकाल में श्रीमद् राधासुधानिधि पाठ एवं श्रीहित चतुरासी पाटोत्सव के साथ हुई। राधावल्लभ मंदिर प्रांगण में चल रहे तीन दिवसीय वृन्दावन महोत्सव में श्रद्धालुओं को ऐसी अलौकिक घटा देखने को मिली। जैसे ही राधावल्लभ लाल के श्रद्धालु ने दुर्लभ दर्शन किए तो स्वत: ही उनके मुंख से हरिवंश नाम धुनी श्री राधावल्लभ श्री हरिवंश नाम गुणगान होने लगा हो। दूरदराज से आए श्रद्धालु अपने आराध्य राधावल्लभ लाल के अलौकिक दर्शन कर मंत्रमुग्ध होने लगे। जैसे आज के पावन पर्व पर ही वृन्दावन की स्थापना हुई हो। राधावल्लभ संप्रदाय अंतर्गत मदनटेर ऊंची ठौर पर विशेष कुंज बनाए गए जहां सभी श्रद्धालुओं ने विशेष कुंजों के दर्शन किए एवं वृन्दावन के समाजियों द्वारा समाज गायन किया गया। दूरदराज से आए श्रद्धालुओं ने तीन दिवसीय वृन्दावन महोत्सव में ऐसा आनंद लिया जैसे वो अमृतरूपी रस का आनंद ले रहे हों। राधावल्लभ मंदिर में मनाए गए तीन दिवसीय वृन्दावन महोत्सव में भजन संध्या पर विदित सिंह चौहान एवं नृत्य भाव प्रस्तुति पर भारती डांग द्वारा मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं एवं मदनटेर से राधावल्लभ मंदिर तक चाव सवारी निकाली गई। जिसमें सभी श्रद्धालुओं ने हरिनाम संकीर्तन के साथ झूमते हुए आनंद लिया।

राधावल्लभ मंदिर के सेवायत मोहित मराल गोस्वामी ने बताया कि आज के पावन पर्व पर वंशी अवतार हित हरिवंश चन्द्र महाप्रभु राधावल्लभ लाल को वृन्दावन धाम लेकर पधारे थे। उनसे पहले वृन्दावन का वर्णन भागवत-पुराणों में मिलता था। यहां उस समय कोई आता-जाता नहीं था। महाप्रभुजी ने वृन्दावन धाम की पुर्नस्थापना की थी। तभी से यहां तीन दिवसीय वृन्दावन धाम का प्राकट्योत्योत्सव श्रीहित वृन्दावन महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। महाप्रभुजी ने मदनटेर स्थित ऊंची ठौर पर राधावल्लभ लाल की अपने जीवन में लता-पताओं में रहकर सेवा की थी। उन्होंने यहां स्थान पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं होने दिया था। वह सदैव राधावल्लभ लाल की लता-पताओं में रहकर ही सेवा करना चाहते थे। राधावल्लभ संप्रदाय अंतर्गत राधावल्लभ मंदिर, सेवाकुंज, रासमण्डल, मदनटेर सभी प्रमुख स्थानों पर तीन दिवसीय वृन्दावन महोत्सव का पर्व पर बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। राधावल्लभ मंदिर में श्रीहित वृन्दावन महोत्सव का आयोजन श्रीहित हरिवंश प्रचार मण्डल ट्रस्ट ने किया।

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