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आजमगढ़

आजमगढ़ में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में 153 जोड़ों की होगी शादी।

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आजमगढ़ (विजय कसौधन)।
कोरोना संक्रमण के दौर में बंद पड़ी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना अब फिर से शुरू होने जा रही है। इस योजना में अब तक 153 जोड़ों का पंजीकरण हो चुका है।
प्रदर्शनी पंडाल में 18 जनवरी को नवदंपति सात फेरे लेकर दांपत्य जीवन में प्रवेश करेंगे। समारोह को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। विवाह के लिए प्रदेश सरकार एक दंपति पर 51 हजार रुपये खर्च करेगी।
मार्च में लॉकडाउन लागू होने के बाद यह समारोह बराबर स्थगित रहा। अब संक्रमण की स्थिति में सुधार आने के बाद प्रदेश सरकार ने इस योजना में पंजीकरण के लिए फिर से प्रक्रिया शुरू की।

महराजगंज के चर्चित लोक कलाकार शिरोमणि दुबे

सरकार की तरफ से इस योजना में 153 विवाह करने का लक्ष्य तय किया है। मंगलवार तक 153 पंजीकरण हो चुके हैं। नवदंपतियों को 35 हजार रुपये नगद और 10 हजार रुपये का सामान दिया जाएगा। सामान में आभूषण और कपड़े आदि दिए जाएंगे।
समाज कल्याण अधिकारी वी0 के0 सिंह ने बताया कि समारोह प्रदर्शनी पंडाल में आयोजित किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक सामग्री के लिए जेम पोर्टल एवं ई टेंडरिंग के माध्यम से खरीदी जा रही है। मंच संचालन का कार्य महराजगंज के चर्चित लोक कलाकार शिरोमणि दुबे करेंगे साथ ही सभी जगह मांगलिक कार्यक्रम में आजमगढ़ के क्षेत्रीय कलाकार बृजेश और सौरभ सम्राट के द्वारा होगा।

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Ambala

मेघनाथ पराक्रम, लक्ष्मण शक्ति एवं कुंभकरण वध का मंचन हुआ

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करनैलगंज गोण्डा(ब्यूरो)। नगर की प्रसिद्ध रामलीला मंचन में रविवार को मेघनाथ पराक्रम, लक्ष्मण शक्ति एवं कुंभकरण वध की लीला का सजीव मंचन किया गया। लगातार रामलीला का मंचन देखने के लिए भीड़ बढ़ रही है। रविवार की लीला में मेघनाथ मायावी रथ पर आरूढ़ होकर अपने दल बल के साथ रामादल पर आक्रमण कर देता है। हनुमान, सुग्रीव, जामवंत व श्रीराम से युद्ध के बाद लक्ष्मण व मेघनाथ में घनघोर युद्ध होने लगता है। लक्ष्मण के बाणों से तिलमिला उठता है। अंत में उसने ब्रह्मा द्वारा प्राप्त शक्ति बाण का संधान किया। जिसके प्रहार से लक्ष्मण जी मूर्छित हो जाते है। फिर उनके राक्षसी सेना लक्ष्मण जी के शरीर को उठाने का प्रयास करती है इतने में हनुमान जी पहुंच जाते है और सारे राक्षसों को मार के भगा देते है और लक्ष्मण को मूर्छित अवस्था में श्रीराम के पास ले आते है। श्रीराम विलाप करने लगते है तभी विभीषण के परामर्श से हनुमान लंका जाते है और सुषेन वैध को उठाकर ले आते है। वैध के बताए अनुसार हनुमान जी द्रोरदागिरी पर्वत को प्रस्थान करते है तथा संजीवनी बूटी न खोज पाने के कारण पूरे पर्वत को उठाकर आकाश मार्ग से चल देते है। अवध क्षेत्र से गुजरते हुए भरत जी देखते है और बाण चला देते है, जिसके कारण हनुमान जी पर्वत सहित भूमि पर आ जाते है। भरत जी और हनुमान जी में वार्ता होती है तथा यह बताते है की यदि रात बीत गई तो संजीवनी का प्रभाव नही रह जायेगा और लक्ष्मण जी के प्राण बचाना मुश्किल हो जायेगा। अविलंब भरत से विदा होने के बाद हनुमान जी रमाद्ल में आ जाते है सुषेण वैध संजीवनी बूटी द्वारा औषधि तैयार करके लक्ष्मण को पिलाते है औषधि के प्रभाव लक्ष्मण जी चैतन्य अवस्था में आ जाते है सारे रामादल में प्रसन्नता को लहर छा जाती है। उधर रावण यह समाचार पाकर कुंभकरण को जगाने जाता है काफी प्रयास के बाद उसके उठने पर उसे मांस मंदिरा का सेवन कराया जाता है। फिर रावण सारी बाते बताता है कुंभकरण रावण को समझता है कि सीता जगदम्बा है उनका हरण करके तुमने अच्छा नही किया मां सीता कालरात्रि स्वरूपा है। इसलिए बैर व संघर्ष न करो सीता को वापस कर दो, तब रावण कुंभकरण पर क्रोधित होता है। भाई को उलहाना देता है अंत में कुंभकरण युद्ध के लिए प्रस्थान करता है। श्री राम में घनघोर युद्ध होता है राम के बाणों से उसका मस्तक कट जाता है वह वीरगति को प्राप्त होता है लंका में शोक व्याप्त हो जाता है। जिसमें रावण का अभिनय अभिषेक जायसवाल, मेघनाथ का अभिनय अनुज जायसवाल, कुम्भकरण का अभिनय विकास जायसवाल ने किया। लीला के लेखक व निर्देशक श्री भगवान साह तथा संचालक पंडित राम चरित्र मिश्र महाराज ने किया। मैदान में कन्हैया लाल वर्मा, नीरज जायसवाल, विमलेंद्र जायसवाल, कमलेश सोनी , आजाद कसेरा, अंसु, अंकित जायसवाल, अनूप गोस्वामी रहे।

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