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जानें क्यों श्राद्ध पक्ष के समय नहीं किए जाते हैं शुभ कार्य : डॉ0 अमिता अग्रवाल

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गोरखपुर।
श्राद्ध पितृत्व के प्रति सच्ची श्रद्धा का प्रतीक हैं। सनातन धर्मानुसार प्रत्येक शुभ कार्य के आरंभ करने से पहले में मां-बाप तथा पितृगण को प्रणाम करना हमारा धर्म है। क्योंकि हमारे पुरखों की वंश परंपरा के कारण ही हम आज जीवित रहे हैं। सनातन धर्म के मतानुसार हमारे ऋषिमुनियों ने हिंदू वर्ष में सम्पादित 24 पक्षों में से एक पक्ष को पितृपक्ष अर्थात श्राद्धपक्ष का नाम दिया। पितृपक्ष में हम अपने पितृगण का श्राद्धकर्म, अर्ध्य, तर्पणतथा पिण्डदान के माध्यम से विशेष क्रिया संपन्न करते हैं। धर्मानुसार पितृगण की आत्मा को मुक्ति तथा शांति प्रदान करने हेतु विशिष्ट कर्मकाण्ड को ‘श्राद्ध’ कहते हैं। श्राद्धपक्ष में शुभकार्य वर्जित क्यों: हमारी संस्कृति में श्राद्ध का संबंध हमारे पूर्वजों की मृत्यु की तिथि से है। अतः श्राद्धपक्ष शुभ तथा नए कार्यों के प्रारंभ हेतु अशुभ काल माना गया है। जिस प्रकार हम अपने किसी परिजन की मृत्यु के बाद शोकाकुल अवधि में रहते हैं तथा शुभ, नियमित, मंगल, व्यावसायिक कार्यों को एक समय अविधि तक के लिए रोक देते हैं। उसी प्रकार पितृपक्ष में भी शुभ कार्यों पर रोक लग जाती है। श्राद्धपक्ष की 16 दिनों की समय अवधि में हम अपने पितृगण से तथा हमारे पितृगण हमसे जुड़े रहते हैं। अत: शुभ-मांगलिक कार्यों को वंचित रखकर हम पितृगण के प्रति पूरा सम्मान व एकाग्रता बनाए रखते हैं।

धर्मशास्त्रों के मतानुसार पितृऋण: शास्त्रों के अनुसार मनुष्य योनी में जन्म लेते ही व्यक्ति पर तीन प्रकार के ऋण समाहित हो जाते हैं। इन तीन प्रकार के ऋणों में से एक ऋण है पितृऋण अत: धर्मशास्त्रों में पितृपक्ष में श्राद्धकर्म के अर्ध्य, तर्पण तथा पिण्डदान के माध्यम से पितृऋण से मुक्ति पाने का रास्ता बतलाया गया है।

पितृऋण से मुक्ति पाए बिना व्यक्ति का कल्याण होना असंभव है। शास्त्रानुसार पृथ्वी से ऊपर सत्य, तप, महा, जन, स्वर्ग, भुव:, भूमि ये सात लोक माने गए हैं। इन सात लोकों में से भुव: लोक को पितृलोक माना गया है।

श्राद्धपक्ष की सोलह दिन की अवधी में पितृगण पितृलोक से चलकर भूलोक को आ जाते हैं। इन सोलह दिन की समयावधि में पितृलोक पर जल का अभाव हो जाता है, अतः पितृपक्ष में पितृगण पितृलोक से भूलोक आकार अपने वंशजो से तर्पण करवाकर तृप्त होते हैं। अतः यह विचारणीय विषय है कि जब व्यक्ति पर ऋण अर्थात कर्जा हो तो वो खुशी मनाकर शुभकार्य कैसे सम्पादित कर सकता है। पितृऋण के कारण ही पितृपक्ष में शुभकार्य नहीं किए जाते। पितृऋण से मुक्तिः शास्त्र कहते हैं की पितृऋण से मुक्ति के लिए श्राद्ध से बढ़कर कोई कर्म नहीं है। श्राद्धकर्म का अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में सर्वाधिक महत्व कहा गया है। इस समय सूर्य पृथ्वी के नजदीक रहते हैं, जिससे पृथ्वी पर पितृगण का प्रभाव अधिक पड़ता है इसलिए इस पक्ष में कर्म को महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों के अनुसार एक श्लोक इस प्रकार है।

एवं विधानतः श्राद्धं कुर्यात् स्वविभावोचितम्। आब्रह्मस्तम्बपर्यंतं जगत् प्रीणाति मानवः ॥

अर्थात् – जो व्यक्ति विधिपूर्वक श्राद्ध करता है, वह ब्रह्मा से लेकर घास तक सभी प्राणियों को संतृप्त कर देता है तथा अपने पूर्वजों के ऋण से मुक्ति पाता है। अतः स्वयं पर पितृत्व के कर्जों के मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

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विद्या मंदिर के छात्राध्यापकों ने निकाली जागरूकता रैली

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गोरखपुर(नगर संवाददाता)। स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के अन्तर्गत शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा विषय पर जागरुकता रैली श्री राम अवध सिंह पूर्व माध्यमिक विद्यालय विशुनपुरा मे प्रशिक्षण कर रहे विद्या मंदिर शिक्षण संस्थान के बीएड छात्राध्यापको द्वारा निकाली गई । कक्षा 6-8 तक के लड़को लडकियो ने शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता से जुडे स्लोगन और नारो के साथ ही क्षेत्रवासियो को सुरक्षा से जुडे महत्वपूर्ण आपातकालीन फ़ोन नम्बरो के प्रति भी जागरुक किया । रैली का संयोजन बीएड के चन्द्र प्रकाश शुक्ल और आँचल यादव के साथ मुकेश चौधरी, विकास गुप्ता , हर्षित जायसवाल , विजय गौतम, अभयशील, सत्यम गुप्ता , मुकुल कुमार , अंजली , प्रतिमा , अंकिता, विजयलक्ष्मी , ममता इत्यादि छात्राध्यापको ने किया । इस अवसर पर प्रवक्ता श्री निखिल पान्डेय के साथ विद्यालय के अध्यापकगण उपस्थित थे। रैली को श्री राम अवध सिंह पूर्व माध्यमिक विद्यालय के प्रबंधक श्री वीरेंद्र कुमार सिंह ने हरी झण्डी दिखा कर रवाना किया ।

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क्षेत्राधिकारी चौरी चौरा ने माला पहनाकर प्रधानों का किया सम्मान

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झंगहा/गोरखपुर। क्षेत्राधिकारी चौरी चौरा मानुष पारिख के नेतृत्व में शासन द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत झंगहा क्षेत्र के ग्राम प्रधानों की एक आवश्यक बैठक थाना परिसर में की गई।
क्षेत्राधिकारी चौरीचौरा द्वारा बैठक में आए ग्राम प्रधानों को अपने अपने क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरा लगाने के लिए जागरूक किया गया । उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से गांवों में हो रहे अपराध को रोका जा सकता है। जिन गांवों में ग्राम प्रधान द्वारा कैमरे लगा दिए गए हैं ऐसे ग्राम प्रधानों को क्षेत्राधिकारी द्वारा माला पहना कर सम्मानित किया गया। जिसमें ग्राम प्रधान संघ के ब्लॉक अध्यक्ष नागेंद्र सिंह धीरज ग्राम प्रधान गहिरा संगीता देवी ग्राम प्रधान जमरु गोविंद यादव ग्राम प्रधान लक्ष्मीपुर जगदीश गुप्ता ग्राम प्रधान प्रतिनिधि कोना सोनबरसा अरविंद पासवान इत्यादि ग्राम प्रधान सम्मानित हुए।
इस अवसर पर थाना प्रभारी झंगहा गौरव राय कनौजिया चौकी प्रभारी उदय भान सिंह राम गिरीश चौहान तूफानी प्रजापति संजय कनौजिया रामबेलास यादव इत्यादि लोग उपस्थित रहे।

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जन्म-जन्म भारत की मां रहूं, कहते-कहते भर आईं कैकयी की आंखें – धीरज कृष्ण शास्त्री

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घघसरा / गोरखपुर । कैकेयी ने जब राम के वियोग में लोगों को अत्यंत दुखी और राम- सीता को बलकल बेस में वृक्ष के नीचे बैठे देखा, तो कलेजा कांप उठा । फूट-फूट कर रोने लगी । लाचार कैकेई को देखकर राम ने कहा- क्या हुआ मां, तो उसने कहा राम, तुम मुझ अभागन पर एक कृपा करोगे । राम ने कहा माता क्या बात करती हैं, आपको क्या चाहिेए ? इतना कहते ही हृदय का उदगार फूट पड़ा और कहा कि- हम हर जन्म में भारत की मां रहूं यही आशीर्वाद दीजिए आप।

उक्त- बातें वृंदावन धाम से पधारे धीरज कृष्ण शास्त्री जी ने कही। वह विकासखंड पाली के ग्राम पनिका में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को कथा रसपान करा रहे थे । उन्होंने कहा कि भारत जैसा महापुरुष कभी-कभी धरती पर आते हैं। हर पुरुष की परीक्षा विपत्ति काल में ही होती है। जो गलती भारत ने की ही नहीं थी, उसका प्रायश्चित कर रहे थे ।
कथा व्यास ने कहा कि- भ्राता प्रेम का ऐसा दूसरा उदाहरण भारतीय ग्रंथ के अतिरिक्त, दुनियां में कहीं नहीं मिलता है। जिस गलती को भारत ने किया ही नहीं था, उसका भी प्रायस्चित कर रहे थे। गलती तो उनकी मां की थी।
भरद्वाज मुनि से भारत ने पूछा कि- हे महात्मन ! भैया राम हमें क्या हमें क्षमा कर देंगे, यह कहते-कहते आंखें भर आईं। मुनि ने कहा कि- भरत
प्रसन्न चित्त राम ने जब स्वस्तिवाचन में पुरोहितों से सुना- आर्यावर्ते भरतखंडे, तो उनके हाथों से जल का पात्र छूट गया और मेरा भरत,मेरा भरत कहते-कहते फूट-फूट कर रोने लगे । सभा की आंखें नम हो गईं।
शास्त्री ने कहा कि- भरत जैसे महात्मा की मां होना छोटी बात नहीं, बहुत सौभाग्य की बात है । उक्त- उक्त- अवसर पर हरिराम पांडेय, सत्यवान, अंगद, परमेश्वर, बालई बाबा, परमेश्वर चौधरी, सीताराम चौरसिया, दयाशंकर चौरसिया, पंकज चौधरी,सत्यदेव, बलराम पांडेय, जगदीश पांडेय समेत कई लोग मौजूद थे।

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