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मध्यप्रदेश

जब राजा जनमेजय ने लिया साँपो को पृथ्वी से खत्म करने का प्रण

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जब राजा जनमेजय ने लिया साँपो को पृथ्वी से खत्म करने का प्रण

दो साँपो के बचने से आज भी बची हुई साँपो की प्रजातियां

मध्यप्रदेश में आज भी गहरी खाई में दिखती हैं कुछ हड्डियां जहां हुआ था नागों का दाह

धार्मिक स्टोरी संक्षेप -विनय त्रिपाठी

मध्यप्रदेश।ये उस समय की बात हैं जब कलयुग में राजा परीक्षित का राज काल चलता था व राजा परीक्षित को आखेट खेलने का बड़ा शौक था।संक्षेप मे यह कहानी भी उस समय की हैं एक समय राजा परीक्षित आखेट की खोज में बहुत दूर जंगल मे जा पहुंचे व धूप व थकान के कारण उनको प्यास महसूस होने लगा।पास ही उनको एक आश्रम दिखाई दी जहाँ शमीक ऋषि समाधि में बैठे थे।प्यास से व्याकुल राजा ऋषि के आश्रम पहुँचे व पानी मांगने लगे ,लेकिन ऋषि नही उठे।कलयुग के प्रभाव से राजा परीक्षित को गुस्सा आ गया व पास के पड़े एक मरे सांप को शमीक ऋषि के गले मे डाल दिये।शमीक ऋषि के पुत्र श्रृंगी जब आश्रम पहुँचे तो पिता के गले मे पड़े सर्प को देखकर श्रृंगी बहुत क्रोधित हुए व दिव्य नेत्रों से जब उन्होंने देखा कि राजा परीक्षित ने यह कृत्य किया हैं तो बिना कारण जाने ही राजा परीक्षित को श्राप दे दिया आ
की आज से ठीक सातवें दिन नागराज तक्षक ले काटने से तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी।जब तक शमीक ऋषि कुछ समझ पाते तब तक उनके पुत्र श्रृंगी ऋषि के मुख से श्राप निकल चुका था।
राजा परीक्षित ने इससे बचने के सभी प्रयास किया पर ठीक सातंवे दिन टोकरी में कीड़े के रूप में छुपकर आए तक्षक नाग के काटने से राजा परीक्षीत की मौत हो गई।

राजा जन्मेजय ने लिया जब पृथ्वी से सर्पों को पृथ्वी से समाप्त करने का प्रण-

राजा जन्मेजय को जब पता चला कि उनके पिता की मृत्यु सर्पदंश से हुई हैं व तक्षक नाग के काटने से उनकी मृत्यु हुई तो क्रोध में राजा जन्मेजय ने पृथ्वी से सभी सर्पों को खत्म करने का प्रण करते हुए “नागदाह” यज्ञ करवाया जिसमें एक से बढ़कर एक प्रकांड विद्वानों,आचार्य,ब्राम्हण शामिल थे ।एक विशिष्ट सिद्ध मंत्र के द्वारा नाग स्वयं यज्ञ के पास पहुंच जाते थे औऱ नागदाह अग्नि कुंड में पट पट गिरते जाते थे।इसे देख भयभीत तक्षक व व एक सर्प जिसका नाम “कर्कोटक” था वह अपनी जान बचाने के लिए उज्जैन में महाकाल राजा की शरण ली थी और शिव की घोर तपस्या करते हुए वह बच गया था।
वही भयभीत तक्षक ने इंद्र की शरण ली और वह इंद्रपुरी में रहने लगा।वासुकि की प्रेरणा से एक ब्राम्हण आस्तीक परीक्षित के यज्ञ स्थल पर पहुँचे और तथा ऋत्विजों की इस्तुति करने लगा।देवताओं के आग्रह के बाद भी जन्मेजय ने यज्ञ नही बन्द किया तो आखिर में अस्तिक मुनी के हस्तक्षेप से जनमेजय ने यज्ञ रोक दिया और इंद्रपूरी में छिपा तक्षक भी बच गया।
आपको बताते चले कि जिस “नागदाह” में इन सर्पों की आहुति दी गई थी वह आज मध्यप्रदेश में कोटा व रतलाम के बीच मे स्थित हैं जिसका नाम आज बदलकर”नागदा “रखा गया हैं।जहां बिड़ला जी की ग्रेसिम की फैक्ट्री लगी हैं जहां सूत इत्यादि निकाला जाता।

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Ambala

मेघनाथ पराक्रम, लक्ष्मण शक्ति एवं कुंभकरण वध का मंचन हुआ

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करनैलगंज गोण्डा(ब्यूरो)। नगर की प्रसिद्ध रामलीला मंचन में रविवार को मेघनाथ पराक्रम, लक्ष्मण शक्ति एवं कुंभकरण वध की लीला का सजीव मंचन किया गया। लगातार रामलीला का मंचन देखने के लिए भीड़ बढ़ रही है। रविवार की लीला में मेघनाथ मायावी रथ पर आरूढ़ होकर अपने दल बल के साथ रामादल पर आक्रमण कर देता है। हनुमान, सुग्रीव, जामवंत व श्रीराम से युद्ध के बाद लक्ष्मण व मेघनाथ में घनघोर युद्ध होने लगता है। लक्ष्मण के बाणों से तिलमिला उठता है। अंत में उसने ब्रह्मा द्वारा प्राप्त शक्ति बाण का संधान किया। जिसके प्रहार से लक्ष्मण जी मूर्छित हो जाते है। फिर उनके राक्षसी सेना लक्ष्मण जी के शरीर को उठाने का प्रयास करती है इतने में हनुमान जी पहुंच जाते है और सारे राक्षसों को मार के भगा देते है और लक्ष्मण को मूर्छित अवस्था में श्रीराम के पास ले आते है। श्रीराम विलाप करने लगते है तभी विभीषण के परामर्श से हनुमान लंका जाते है और सुषेन वैध को उठाकर ले आते है। वैध के बताए अनुसार हनुमान जी द्रोरदागिरी पर्वत को प्रस्थान करते है तथा संजीवनी बूटी न खोज पाने के कारण पूरे पर्वत को उठाकर आकाश मार्ग से चल देते है। अवध क्षेत्र से गुजरते हुए भरत जी देखते है और बाण चला देते है, जिसके कारण हनुमान जी पर्वत सहित भूमि पर आ जाते है। भरत जी और हनुमान जी में वार्ता होती है तथा यह बताते है की यदि रात बीत गई तो संजीवनी का प्रभाव नही रह जायेगा और लक्ष्मण जी के प्राण बचाना मुश्किल हो जायेगा। अविलंब भरत से विदा होने के बाद हनुमान जी रमाद्ल में आ जाते है सुषेण वैध संजीवनी बूटी द्वारा औषधि तैयार करके लक्ष्मण को पिलाते है औषधि के प्रभाव लक्ष्मण जी चैतन्य अवस्था में आ जाते है सारे रामादल में प्रसन्नता को लहर छा जाती है। उधर रावण यह समाचार पाकर कुंभकरण को जगाने जाता है काफी प्रयास के बाद उसके उठने पर उसे मांस मंदिरा का सेवन कराया जाता है। फिर रावण सारी बाते बताता है कुंभकरण रावण को समझता है कि सीता जगदम्बा है उनका हरण करके तुमने अच्छा नही किया मां सीता कालरात्रि स्वरूपा है। इसलिए बैर व संघर्ष न करो सीता को वापस कर दो, तब रावण कुंभकरण पर क्रोधित होता है। भाई को उलहाना देता है अंत में कुंभकरण युद्ध के लिए प्रस्थान करता है। श्री राम में घनघोर युद्ध होता है राम के बाणों से उसका मस्तक कट जाता है वह वीरगति को प्राप्त होता है लंका में शोक व्याप्त हो जाता है। जिसमें रावण का अभिनय अभिषेक जायसवाल, मेघनाथ का अभिनय अनुज जायसवाल, कुम्भकरण का अभिनय विकास जायसवाल ने किया। लीला के लेखक व निर्देशक श्री भगवान साह तथा संचालक पंडित राम चरित्र मिश्र महाराज ने किया। मैदान में कन्हैया लाल वर्मा, नीरज जायसवाल, विमलेंद्र जायसवाल, कमलेश सोनी , आजाद कसेरा, अंसु, अंकित जायसवाल, अनूप गोस्वामी रहे।

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मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश एक ऐसा तीर्थ स्थल जहां कालभैरव का प्रसाद है मदिरा

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मध्यप्रदेश एक ऐसा तीर्थ स्थल जहां कालभैरव का प्रसाद है मदिरा

उज्जैन काल भैरव के साथ फर्नाजी काल भैरव का दर्शन है सबसे महत्वपूर्ण

नागदा से 18 किलोमीटर दूर स्थित है मंदिर फर्नाजी

विनय कुमार त्रिपाठी की कलम से✒️

मध्यप्रदेश। जी हां हमने आपको हमेशा अपने दैनिक पत्रिका के माध्यम से ऐसे तीर्थ स्थल की जानकारी देने के साथ ,अलग अलग प्रदेशों में अलग अलग देवी देवताओं की उनकी मान्यताएं बताई व दिखाई भी। जिस क्रम में आज मैं आपको उस तीर्थ स्थल की जानकारी दे रहा हु ,जहां काल भैरव का मुख्य प्रसाद है मदिरा उज्जैन के कालभैरव की तरह ही यहां श्रद्धालुओं द्वारा मदिरा का भोग लगाया जाता है।
सबसे खास बात यह है कि भोग लगाते समय मदिरा की बदबू समाप्त हो जाती है। भोग लगाने पर यह मदिरा कहा चली जाती है, यह आज भी रहस्य बना हुआ है।दीपावली के बाद इस मंदिर पर 11 दिन का मेला लगता है।यहां दूर दूर से लोग फर्नाजी के दर्शन के लिए आते है।
आपको बताते चले कि मध्यप्रदेश में नागदा(जंक्शन) सिटी जो कि बिड़ला इंड्रस्टीयल एरिया की वजह से प्रसीद्ध है। यहां से 18 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम फर्नाखेरी के समीप ही श्री देवनारायण भेरू जी मंदिर है, जहां एक ही प्रतिमा पर आपको गोरा और काला भेरू जी विराजित है।इसलिए इस प्रतिमा का महत्व अधिक है। मंदिर के पुजारी व वहां वर्षो से रहने वाले स्थानिय लोगों से बात करने पर हमें पता चला कि संवत 1131में इसकी नींव रखी गई थी और 1136 में यह मंदिर बनकर तैयार हुआ था।तबसे लेकर आज तक अपनी मनोकामना को पूर्ण करने के साथ दर्शन को लोग आते है फर्नाजी।एक मुख्य विषय पर आपका हम ध्यान ले चलते है, इस बावड़ी की पानी को लोग”नवप्रसूता” के लिए लोग चमत्कारिक मानते है।ऐसी मान्यता है कि नवप्रसूता के लिए बावड़ी का पानी एक औषधी है।इसलिए दूरदराज से लोग इस बावड़ी का पानी लेने आते है।

देव लोक में पूजे जाते है श्री देवनारायण

मंदिरों के सेवकों के कहना है कि लोकदेवता श्रीदेवनारायण जी जे यहां विश्राम किया था।आज भी श्री देवनारायण की गद्दी भी है।आपको बताते चले कि मध्यप्रदेश, राजस्थान के अलावा अन्य शहरों से भी लोग यहां दर्शन करने आते रहते है।वही इस सड़क के सामने दूसरी ओर साडू माता का मंदिर और बावड़ी भी बनी हुई है जिस बावड़ी के पानी (औषधी) के बारे में हमने ऊपर आपको जानकारी भी दी है। मान्यता है कि जब अंग्रेजो द्वारा ट्रेन की पटरी बनाई जा रही थी तो यह मंदिर बीचों बीच मे आने के कारण इसे रात तोड़ा गया था औऱ मंदिर की टूटी दीवारों को दूसरी तरफ कर दिया गया था जिससे अंग्रेजो द्वारा रेल पटरी बनाई जा रही थी उसमें उनको रुकावट न हो।पर अगले ही दिन जब काम शुरू हुआ तो यह देख सभी अचंभित रह गए कि जो मंदिर रात टूटी हुई थी वह वैसे ही बीचों बीच कैसे खड़ी हो गई-?
अंग्रेजो द्वारा उस मंदिर को हटाने का यह प्रयत्न कई दिन चला पर अगली सुबह मंदिर सजा धजा व वैसे ही निर्मित खड़ा दिखता ,जिससे अंत मे हार कर उनको रेल पटरी को दूसरी तरफ से मोड़कर ले जाना पड़ा। जिसे श्री देवनारायण व कालभैरव जी का चमत्कार व आशीर्वाद बताते है।व तभी से यहां भक्तों की संख्या आने जाने वालों की बढ़ती गई और उनकी हर मुरादों को कहते है सच्चे मन से मांगने पर कालभैरव अवश्य पूरा करते है।

निर्वाण टाइम्स से मैं विनय त्रिपाठी जल्द मिलूंगा धार्मिक स्टोरी में पुनः, ऐसे ही मंदिरों व तीर्थ स्थल की जानकारी के साथ जिससे आपको धार्मिक स्थलों की और भी जानकारियां मिलती रहे।

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Gorkhpur

नाहरपुर ज्योति इंटर कॉलेज में मना आठवां अंतराष्ट्रीय दिवस

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नाहरपुर ज्योति इंटर कॉलेज में मना आठवां अंतराष्ट्रीय दिवस

मुख्य अतिथि पिपराईच विधायक महेंद्र पाल सिंह ने किया कार्यक्रम का सुभारम्भ

शारीरिक व मानसिक मजबूती प्रदान करता है योग-संतराज यादव

गोरखपुर(विनय कुमार त्रिपाठी)।गोरखपुर आठवें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर योगाभ्यास किया गया । इस अवसर मुख्य अतिथि के रूप मे पिपराइच के विधायक महेन्द्र पाल सिंह रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा नेता उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक के सभापति संतराज यादव ने किया।इस अवसर पर विद्यालय के छात्र छात्राओं तथा अध्यापक अध्यापिका एवम प्रबन्ध समिति के सदस्यों के साथ अन्य गणमान्य लोगों ने योगाभ्यास किया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक महेन्द्र पाल सिंह जी ने कहा कि
योग का मतलब होता है जुड़ना, हम किसी से मानसिक स्तर से जुड़े, चाहे वह ईश्वर से हो या उनके बनाए हुए सृष्टि से। एक चीज से हमलोग जुड़े हुए हैं जिससे जुड़ने से सिर्फ अशांति ,दुख,एवं परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन एक चीज हैं जिससे योग लगाने से स्वतः सारी परेशानियों का अंत होता है और सारे सद्गुणो से व्यक्ति भर जाता है और सद्गुणी व्यक्ति के पास दुःख जैसे अंधकार कभी आ ही नहीं सकता, जिस तरह सूर्योदय होने से स्वतः अंधकार दूर हो जाता है ठीक उसी तरह सर्वोच्च सत्ता से जुड़ने के बाद सिर्फ सर्वोच्च सत्ता के शक्ति का अनुभव होने लगता है और वही वाइब्रेशन पुरे विश्व को सूख, शांति, शक्ति, आनंद, पवित्रता, प्रेम, और ज्ञान का संचार करता है जिससे विश्व में शांति स्थापित होती है।
सहकारी ग्राम विकास बैंक के सभापति संतराज यादव ने कहा कि योग आत्मा और परमात्मा का मिलन है जिसके साथ शारीरिक व्यायाम भी हो जाता है जिस तरह शरीर को रोज साफ किया जाता है ठीक उसी तरह मन को भी ईश्वरीय योग में लगाकर नित दिन मन की सफाई होनी चाहिए, ना की साल में एक बार। शरीर की स्वच्छता रोज तो मन की स्वच्छता भी रोज होनी चाहिए ना की साल में एक बार
विद्यालय के प्रधानाचार्य रवि प्रकाश यादव ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर मुख्य रूप से विद्यालय के प्रबंधक अजय प्रकाश यादव, भाजपा जिला मंत्री नरेंद्र सिंह, जिला मंत्री रामानन्द यादव, चरगावां मण्डल अध्यक्ष दया शंकर मिश्र, सोशल मीडिया संयोजक अभिषेक मद्धेशिया, अनिल चौहान, पूर्व जिला पंचायत सदस्य रामभोग सिंह, नरेन्द्र कुमार शुक्ल, प्रवीण गुप्ता, आशुतोष सिंह, सहित अन्य गणमान्य नागरिक तथा छात्र छात्रा उपस्थित रहे।

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