
•करवा चौथ पारिवारिक संस्कार, सामाजिक एकता और दांपत्य जीवन की मधुरता के संदेश।
महराजगंज (आनन्द कुमार मिश्र)।
चांद का इंतजार, हाथों में सजी मेहंदी, सोलह श्रृंगार की खूबसूरती और जीवनसाथी की लंबी उम्र की मंगलकामना करवा चौथ का पर्व भारतीय संस्कृति में प्रेम, आस्था, त्याग और समर्पण की अनुपम तस्वीर प्रस्तुत करता है। यह त्योहार केवल एक व्रत या धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट विश्वास, पारिवारिक एकता और रिश्तों की भावनात्मक मजबूती का प्रतीक है। इसी पावन अवसर पर महिला नेतृत्वकर्ताओं ने समाज को प्रेम, सम्मान, सहयोग और संस्कारों से जुड़ा सार्थक संदेश दिया।
1. नगर पंचायत परतावल की चेयरमैन प्रियंका गुप्ता ने कहा कि करवा चौथ पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और समर्पण की भावना को और प्रगाढ़ करने वाला पर्व है। परिवार की असली खुशहाली तभी संभव है, जब पति-पत्नी एक-दूसरे की भावनाओं को समझें, सम्मान करें और जीवन के हर उतार-चढ़ाव में साथ खड़े रहें। उन्होंने कहा कि महिलाओं का त्याग, उनकी भावनाएं और परिवार के प्रति उनका योगदान सम्मान का अधिकारी है। त्योहारों की सार्थकता तभी है, जब घर-परिवार में प्रेम और खुशियों का वातावरण बना रहे। प्रियंका गुप्ता ने परिवार की खुशहाली और आपसी विश्वास को बताया रिश्तों की असली ताकत।
2. समाजवादी पार्टी महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष सत्यभामा सिंह ने कहा कि करवा चौथ केवल चांद देखने और व्रत खोलने की परंपरा नहीं, बल्कि रिश्तों में विश्वास और संवेदनशीलता बनाए रखने की प्रेरणा भी है। किसी भी रिश्ते की खूबसूरती बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि आपसी समझ, सहयोग और सम्मान से बढ़ती है। उन्होंने कहा कि परिवार समाज की सबसे मजबूत इकाई है। जब परिवार में प्रेम, संवाद और संस्कार होंगे, तभी समाज में भी सद्भाव और समरसता मजबूत होगी। महिलाओं का सम्मान किसी एक त्योहार तक सीमित न रहकर हमारे व्यवहार और सोच का हिस्सा बनना चाहिए। सत्यभामा सिंह ने सामाजिक समरसता और रिश्तों में संवेदनशीलता का दिया संदेश।
3. पंचायत इंटरमीडिएट कॉलेज परतावल की प्रबंधक जयंती त्रिपाठी ने कहा कि करवा चौथ भारतीय संस्कृति की ऐसी परंपरा है, जो पीढ़ियों को रिश्तों की अहमियत और पारिवारिक संस्कारों से जोड़ती है। परिवार बच्चों की पहली पाठशाला होता है, जहां वे प्रेम, त्याग, सम्मान और सहयोग का महत्व सीखते हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के इस दौर में जीवनशैली भले बदल रही हो, लेकिन रिश्तों की गरिमा और संस्कारों का महत्व कभी कम नहीं होना चाहिए। पति-पत्नी के बीच आपसी समझ और सम्मान ही सुखी परिवार की मजबूत नींव है। जयंती त्रिपाठी ने नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और पारिवारिक संस्कारों से जोड़ने पर दिया जोर।
4. श्रीमती पानमती देवी इंटरमीडिएट कॉलेज परतावल प्रबन्धक सुनीता सिंह ने कहा कि करवा चौथ भारतीय नारी की आस्था, श्रद्धा और समर्पण का खूबसूरत प्रतीक है। लेकिन रिश्तों की मजबूती केवल एक दिन के व्रत से नहीं, बल्कि साल के 365 दिन एक-दूसरे के प्रति प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी निभाने से आती है। उन्होंने कहा कि पति-पत्नी एक-दूसरे के पूरक हैं। परिवार तभी मजबूत बनता है, जब दोनों को समान सम्मान और सहयोग मिले। महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों को प्राथमिकता देना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। सुनीता सिंह ने नारी सम्मान और समान सहभागिता को बताया सुखी परिवार की बुनियाद।
करवा चौथ का धार्मिक महत्व चंद्रमा की पूजा, करवा पूजन और पति की दीर्घायु की मंगलकामना से जुड़ा है। परंपरागत रूप से सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करती हैं। वहीं इसका सांस्कृतिक पक्ष प्रेम, पारिवारिक एकजुटता, लोकपरंपराओं और सामाजिक मेल-मिलाप को मजबूती देता है। आज के बदलते सामाजिक परिवेश में इस पर्व का व्यापक संदेश यही है कि जीवनसाथी का साथ केवल रस्मों तक सीमित न रहे, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुख में सहभागी बनने, महिलाओं के सम्मान और परिवार की खुशहाली का संकल्प भी बने। चांद तो हर वर्ष निकलता है, लेकिन रिश्तों में प्रेम और विश्वास की रोशनी प्रतिदिन बनाए रखनी पड़ती है। करवा चौथ की यही खूबसूरत सीख हर घर-आंगन को खुशियों से रोशन कर सकती है।