माता ही करती है व्यक्तित्व और संस्कारों का निर्माण, –माता निर्माता भवति : संस्कारों से संवरता है बच्चे का भविष्य

महराजगंज/लक्ष्मीपुर।आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी भावी माता अभिनन्दन समारोह के सफलता को लेकर अखिल विश्व गायत्री परिवार ने लक्ष्मीपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत सोंधी एवं सिसवा तौफीर में महिलाओं एवं गायत्री परिवार के सदस्यों संघ बैठक कर महराजगंज में सम्मिलित होने के लिए आमंत्रित किया गया। शिक्षक दिवस पर टोली की सदस्यों ने कहा कि मां बच्चे के जीवन की पहली गुरु और उसके व्यक्तित्व की प्रथम शिल्पकार होती है। ‘माता निर्माता भवति’ का भाव यही है कि मां अपने स्नेह, संस्कार और मार्गदर्शन से बच्चे के चरित्र का निर्माण करती है। जन्म से लेकर जीवन के प्रत्येक पड़ाव तक मां बच्चे को सही और गलत का भेद समझाती है तथा कठिन परिस्थितियों में धैर्य और साहस के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। परिवार में मिलने वाले संस्कारों की नींव भी प्रायः मां ही मजबूत करती है। बच्चों की शिक्षा, अनुशासन, व्यवहार और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूकता में उसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि संस्कारवान समाज और सशक्त राष्ट्र के निर्माण में मातृशक्ति का योगदान सर्वोपरि माना जाता है। इसके लिए उपकेन्द्र पर गर्भवती महिलाओं से अपने विचार साझा किया गया।



