चौरीचौरा में आरएसएस का भव्य पथ संचलन सनातन संस्कृति और हिंदू समाज की एकता का दिया संदेश

विजयादशमी उत्सव पर स्वयंसेवकों ने किया शस्त्र पूजन
चौरीचौरा चौराहे से मुंडेरा बाजार तक निकला करीब चार किलोमीटर लंबा पथ संचलन
ब्रह्मपुर/गोरखपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) नगर चौरीचौरा की ओर से विजयादशमी के पावन पर्व पर पथ संचलन एवं शस्त्र पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वयंसेवकों, कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला। अनुशासित तरीके से निकले पथ संचलन के माध्यम से सामाजिक एकता, संगठन और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया।
पथ संचलन चौरीचौरा चौराहे से शुरू होकर मुंडेरा बाजार तक पहुंचा। लगभग चार किलोमीटर लंबे इस संचलन में स्वयंसेवक अनुशासन के साथ शामिल हुए। विजयादशमी के अवसर पर आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम में भी स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोरक्ष प्रांत के प्रांत प्रचारक रमेश जी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर संघचालक सरदार जी ने की। इस अवसर पर जिला कार्यवाह राजन जी, जिला संपर्क प्रमुख अरुण जी, जिला प्रचार प्रमुख ऋषिकेश ऋषि, सह विभाग कार्यवाह करुणेश जी, सह जिला कार्यवाह विकास जी, जिला प्रचारक पंकज जी तथा जिला धर्म जागरण प्रमुख राम भवन जी सहित संघ के अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अलावा वरिष्ठ समाजसेवी रंग नारायण जी, आनंद शाही जी, चौरीचौरा विधायक ई. सरवन निषाद, रामप्रीत जी, अजय जी, संजय जी, अविनाश जी, संदीप जी, चंदन जी, आकाश जी, रंग मोहन जी, साधु सरन जी, रामपति वर्मा जी और पिंटू जी सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक एवं कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की।
हिंदू समाज की एकता का किया आह्वान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रांत प्रचारक रमेश जी ने कहा कि सनातन संस्कृति और हिंदू धर्म को कमजोर करने के प्रयास अलग-अलग युगों में विभिन्न रूपों में होते रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 101 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर संपूर्ण हिंदू समाज से संगठित होने और आपसी एकता को मजबूत करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “संघे शक्ति कलियुगे”, अर्थात कलियुग में संगठन में ही शक्ति है। उन्होंने समाज के लोगों से सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा करने, सामाजिक समरसता बढ़ाने और राष्ट्रहित में एकजुट होकर कार्य करने की अपील की।
विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में पथ संचलन और शस्त्र पूजन के माध्यम से संगठन, अनुशासन और सामाजिक एकता का संदेश दिया गया।



